हनुमानाष्टक (श्लोक 5-6)
हनुमानाष्टक श्लोक 5-6 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौं हम सों जु, बिना सुधि लाए इहां पगुधारो।।
हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया सुधि प्राण उबारो।
को नहीं जानत है जग में, कपि संकटमोचन नाम तिहारो।।
पंक्तिवार भावार्थ
"अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो"
शाब्दिक अर्थ: "अंगद और वानरों के साथ सीता जी को ले गए (रावण द्वारा), इसलिए कपिराज सुग्रीव ने खोज का आदेश दिया।"
भावार्थ: सीता के अपहरण के बाद सुग्रीव ने वानर सेना को उनकी खोज का आदेश दिया। यहाँ "कपीस" (वानर राजा सुग्रीव) की आज्ञा और अंगद के नेतृत्व में खोज की चुनौती दर्शाई गई है।
"जीवत ना बचिहौं हम सों जु, बिना सुधि लाए इहां पगु धारो"
शाब्दिक अर्थ: "सीता जी की सुधि (खबर) लाए बिना हम जीवित नहीं बचेंगे, इसलिए यहाँ कदम रोक दो।"
भावार्थ: वानर सेना ने निराश होकर कहा कि सीता जी का पता न लगने पर वे प्राण त्याग देंगे। यहाँ उनकी विवशता और हनुमान पर निर्भरता का भाव है।
"हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया सुधि प्राण उबारो"
शाब्दिक अर्थ: "समुद्र तट पर थककर सभी ने देखा, तब हनुमान ने सीता की सुधि लाकर हमारे प्राण बचाए।"
भावार्थ: हनुमान जी ने समुद्र लांघकर सीता जी का पता लगाया और वानरों के प्राणों की रक्षा की। यहाँ उनकी शक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा है।
"को नहीं जानत है जग में, कपि संकटमोचन नाम तिहारो"
शाब्दिक अर्थ: "हे कपि संकटमोचन! संसार में कौन नहीं जानता कि यह नाम तुम्हारा है?"
भावार्थ: हनुमान जी को "संकटमोचन" कहकर उनकी विश्वव्यापी ख्याति और भक्तों के दुख हरने की क्षमता का वर्णन किया गया है।
प्रमुख शिक्षाएँ
संकट में धैर्य: हनुमान जी ने असंभव लगने वाले कार्य (समुद्र लांघना) को साहस से पूरा किया।
भक्ति और कर्तव्य: सीता जी की खोज में हनुमान की निष्ठा भक्ति और कर्तव्य का आदर्श है।
आशावाद: निराशा के क्षण में भी हनुमान ने आशा का दीप जलाया।
काव्यगत विशेषताएँ
अलंकार: "संकटमोचन" में रूपक अलंकार।
छंद: दोहा और चौपाई का प्रभावी प्रयोग।
भाषा: अवधी मिश्रित ब्रजभाषा, जो भक्ति रस को सहजता से व्यक्त करती है।
निष्कर्ष
यह श्लोक हनुमान जी की साहसिकता, रामभक्ति, और संकटमोचन की भूमिका को उजागर करता है। आज भी इसे संकटों के समय शक्ति और आत्मविश्वास के लिए पढ़ा जाता है।
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