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हनुमानाष्टक (श्लोक 17)

 हनुमानाष्टक श्लोक 17 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन: श्लोक लाल देह लाली लसे अरु धरि लाल लंगूर। बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।। यह श्लोक प्रसिद्ध "हनुमानाष्टक" का एक अंश है, जिसमें भगवान हनुमान जी के स्वरूप, गुण और उनकी महिमा का वर्णन किया गया है। शब्दार्थ लाल देह – लाल रंग का शरीर लाली लसे – लालिमा से चमकते हुए अरु धरि लाल लंगूर – और लाल रंग का वानर (लंगूर) रूप धारण किए हुए बज्र देह – वज्र (हीरे) के समान कठोर शरीर दानव दलन – दानवों का संहारक जय जय जय – बार-बार विजय हो, जय हो कपि सूर – वानर वीर (कपि = वानर, सूर = वीर) भावार्थ हनुमान जी का शरीर लाल रंग का है, जो लालिमा से दमक रहा है। उन्होंने लाल रंग का वानर रूप धारण किया हुआ है। उनका शरीर वज्र के समान कठोर और मजबूत है। वे दानवों का नाश करने वाले हैं। हे वानर वीर हनुमान! आपकी बार-बार जय हो, जय हो, जय हो विस्तृत विवेचन 1. हनुमान जी का स्वरूप इस श्लोक में हनुमान जी के बाह्य स्वरूप का सुंदर वर्णन किया गया है। उनका शरीर लाल रंग का है, जो ऊर्जा, शक्ति और उत्साह का प्रतीक है। लाल रंग भारतीय संस्कृति में साहस, शक्ति और विजय का ...

हनुमानाष्टक (श्लोक 15-16)

 हनुमानाष्टक श्लोक 15-16 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन : श्लोक (हनुमानाष्टक) काज किए बड़ देवन के तुम, वीर महाप्रभु देखि विचारो। कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसो नहीं जात है टारो।। बेगि हरौ हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो। को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।। भावार्थ हे वीर महाप्रभु हनुमान जी! आपने देवताओं के भी बड़े-बड़े कार्य किए हैं, यह सबने देखा और समझा है। हे संकटमोचन! इस संसार में ऐसा कौन सा संकट है, जो आपसे दूर नहीं हो सकता? हे हनुमान जी! यदि मुझ गरीब पर कोई भी संकट आ जाए, तो आप उसे शीघ्र ही दूर कर दीजिए। इस संसार में कौन नहीं जानता कि आप ‘संकटमोचन’ के नाम से प्रसिद्ध हैं? विस्तृत विवेचन 1. हनुमान जी की महिमा इस श्लोक में कवि ने हनुमान जी की महानता और उनकी संकटमोचन शक्ति का वर्णन किया है। हनुमान जी ने न केवल भगवान श्रीराम के कार्यों को सिद्ध किया, बल्कि देवताओं के भी असाध्य कार्यों को संपन्न किया। उनकी वीरता, बुद्धिमत्ता और निष्ठा के कारण समस्त देवता भी उनकी प्रशंसा करते हैं। 2. संकटों का निवारण कवि कहता है कि संसार में कोई भी संकट ऐसा नहीं है, जिसे हनुम...

हनुमानाष्टक श्लोक (13-14)

 हनुमानाष्टक श्लोक 13-14 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन : श्लोक: बंधु समेत जबै अहिरावण, लै रघुनाथ पताल सिधारो। देबिहिं पूजि भलि विधि सो बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो।। जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत संहारो। को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।। भावार्थ (Meaning) जब अहिरावण (रावण का भाई) श्रीराम और लक्ष्मण को उनके बंधु (भाई) सहित पकड़कर पाताल लोक (अधोलोक) ले गया, वहाँ उसने देवताओं की पूजा कर, मंत्रों के विचार के साथ उनकी बलि देने की तैयारी की। उसी समय, हे हनुमान! आप वहाँ पहुँचे और अहिरावण सहित उसकी समस्त सेना का संहार कर दिया। हे संकटमोचन! इस संसार में कौन नहीं जानता कि आप संकटों का नाश करने वाले हैं? विस्तृत विवेचन (Detailed Explanation) 1. पृष्ठभूमि (Background) हनुमानाष्टक में यह प्रसंग रामायण के उस प्रसिद्ध प्रसंग का उल्लेख करता है, जब अहिरावण ने छलपूर्वक श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक ले गया था। अहिरावण रावण का भाई था और तंत्र-मंत्र में प्रवीण था। उसने दोनों भाइयों की बलि देने का निश्चय किया। 2. श्लोक की पंक्तियों का अर्थ बंधु समेत जबै अहिर...

हनुमानाष्टक श्लोक (11-12)

 हनुमानाष्टक श्लोक 11-12 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन: श्लोक (हनुमानाष्टक) रावन जुद्ध अजान कियो तब, नाग की पाश सबै सिर डारो। श्री रघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो।। आनि खगेश तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निबारो। को नहीं जानत है जग में, कपि संकटमोचन नाम तिहारो।। भावार्थ (Meaning) जब रावण के साथ युद्ध हुआ, तब उसने (रावण ने) मायावी नागपाश (सर्पों के बंधन) का प्रयोग किया और श्रीराम, लक्ष्मण तथा समस्त वानर सेना को नागपाश में बाँध दिया। इस भयंकर संकट के समय, सब लोग मोह (मूर्छा) में पड़ गए और कोई भी उपाय नहीं सूझ रहा था। तब गरुड़ (खगेश) को हनुमान जी ने बुलाया, जिन्होंने नागों के बंधन काट दिए और सबको भयमुक्त कर दिया। हे हनुमान! संसार में कौन नहीं जानता कि आप संकटमोचन (संकटों का निवारण करने वाले) हैं? विस्तृत विवेचन (Detailed Explanation) 1. प्रसंग की पृष्ठभूमि यह श्लोक रामायण के उस प्रसंग से जुड़ा है जब रावण और श्रीराम के बीच युद्ध चल रहा था। रावण ने अपनी मायावी शक्ति से नागपाश का प्रयोग किया, जिससे श्रीराम, लक्ष्मण और समस्त वानर सेना बुरी तरह बंध गए। नागपाश एक ऐसा अस्त्र था, ...

हनुमानाष्टक श्लोक (9-10)

 हनुमानाष्टक श्लोक 9-10 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन: श्लोक बान लग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सुत रावन मारो। लै गृह वैद्य सुषेण समेत, तबै गिरि द्रोन सु बीर उपारो।। लानि संजीवन हाथ दई, तब लछिमन के तुम प्राण उबारो। को नहीं जानत है जग में, कपि संकटमोचन नाम तिहारो।। भावार्थ जब रावण के पुत्र मेघनाद (इंद्रजीत) ने लक्ष्मण जी के हृदय में बाण मार दिया, तो लक्ष्मण जी मूर्छित होकर मृत्यु-शैया पर पहुँच गए। समस्त वानर सेना और श्रीराम अत्यंत शोकाकुल हो गए। ऐसे कठिन समय में हनुमान जी ने अपनी बुद्धि, वीरता और पराक्रम का परिचय दिया। वे लंका से वैद्य सुषेण को ले आए, जिन्होंने बताया कि लक्ष्मण जी को बचाने के लिए हिमालय के द्रोणगिरि पर्वत पर स्थित "संजीवनी बूटी" लानी होगी। हनुमान जी तुरंत आकाश मार्ग से द्रोणगिरि पर्वत पहुँचे, लेकिन संजीवनी बूटी पहचान नहीं पाए, तो पूरा पर्वत ही उठा लाए। सुषेण वैद्य ने बूटी निकालकर लक्ष्मण जी को दी, जिससे वे पुनः जीवित हो गए। इस प्रकार, हनुमान जी ने असंभव को संभव कर दिखाया और लक्ष्मण जी को प्राणदान दिया। इसलिए संपूर्ण जगत जानता है कि "कपि (हनुमान) संकटमोच...

हनुमानाष्टक (श्लोक 7-8)

 हनुमानाष्टक श्लोक 7-8 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन: श्लोक: रावण त्रास दई सिय को तब, राक्षस सो कहिं सोक निवारो। ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो।। चाहत सिय अशोक सो आगि हो, दे प्रभु मुद्रिका सोक निवारो। को नहीं जानत है जग में, कपि संकटमोचन नाम तिहारो।। भावार्थ इस श्लोक में भगवान हनुमान जी की संकटमोचन (संकट हरने वाले) रूप में स्तुति की गई है। जब रावण ने सीता माता को त्रस्त किया, उन्हें दुःख दिया और राक्षसों के द्वारा उन्हें डराया-धमकाया गया, तब हनुमान जी वहां पहुंचे। उन्होंने राक्षसों का संहार किया और सीता माता का दुःख दूर किया। सीता माता ने जब अशोक वाटिका में आग लगाने की इच्छा जाहिर की (अपने दुःख से व्याकुल होकर), तब हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम की मुद्रिका (अंगूठी) उन्हें दी, जिससे उनका दुःख दूर हो गया। इस प्रकार, हनुमान जी का संकटमोचन नाम जगत प्रसिद्ध है, ऐसा कौन है जो इसे नहीं जानता? विस्तृत विवेचन 1. रावण त्रास दई सिय को तब, राक्षस सो कहिं सोक निवारो। जब रावण ने माता सीता का हरण किया, उन्हें लंका में अशोक वाटिका में बंदी बनाकर रखा। रावण और उसके राक्षस सीता माता को त...

हनुमानाष्टक (श्लोक 5-6)

 हनुमानाष्टक श्लोक 5-6 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन: अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो। जीवत ना बचिहौं हम सों जु, बिना सुधि लाए इहां पगुधारो।। हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया सुधि प्राण उबारो। को नहीं जानत है जग में, कपि संकटमोचन नाम तिहारो।। पंक्तिवार भावार्थ "अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो" शाब्दिक अर्थ: "अंगद और वानरों के साथ सीता जी को ले गए (रावण द्वारा), इसलिए कपिराज सुग्रीव ने खोज का आदेश दिया।" भावार्थ: सीता के अपहरण के बाद सुग्रीव ने वानर सेना को उनकी खोज का आदेश दिया। यहाँ "कपीस" (वानर राजा सुग्रीव) की आज्ञा और अंगद के नेतृत्व में खोज की चुनौती दर्शाई गई है। "जीवत ना बचिहौं हम सों जु, बिना सुधि लाए इहां पगु धारो" शाब्दिक अर्थ: "सीता जी की सुधि (खबर) लाए बिना हम जीवित नहीं बचेंगे, इसलिए यहाँ कदम रोक दो।" भावार्थ: वानर सेना ने निराश होकर कहा कि सीता जी का पता न लगने पर वे प्राण त्याग देंगे। यहाँ उनकी विवशता और हनुमान पर निर्भरता का भाव है। "हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया सुधि प्राण उबारो...