हनुमानाष्टक (श्लोक 7-8)

 हनुमानाष्टक श्लोक 7-8 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

श्लोक:

रावण त्रास दई सिय को तब, राक्षस सो कहिं सोक निवारो।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो।।

चाहत सिय अशोक सो आगि हो, दे प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।

को नहीं जानत है जग में, कपि संकटमोचन नाम तिहारो।।

भावार्थ

इस श्लोक में भगवान हनुमान जी की संकटमोचन (संकट हरने वाले) रूप में स्तुति की गई है। जब रावण ने सीता माता को त्रस्त किया, उन्हें दुःख दिया और राक्षसों के द्वारा उन्हें डराया-धमकाया गया, तब हनुमान जी वहां पहुंचे। उन्होंने राक्षसों का संहार किया और सीता माता का दुःख दूर किया। सीता माता ने जब अशोक वाटिका में आग लगाने की इच्छा जाहिर की (अपने दुःख से व्याकुल होकर), तब हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम की मुद्रिका (अंगूठी) उन्हें दी, जिससे उनका दुःख दूर हो गया। इस प्रकार, हनुमान जी का संकटमोचन नाम जगत प्रसिद्ध है, ऐसा कौन है जो इसे नहीं जानता?

विस्तृत विवेचन

1. रावण त्रास दई सिय को तब, राक्षस सो कहिं सोक निवारो।

जब रावण ने माता सीता का हरण किया, उन्हें लंका में अशोक वाटिका में बंदी बनाकर रखा। रावण और उसके राक्षस सीता माता को तरह-तरह से डराते और कष्ट देते थे।

सीता माता अत्यंत दुःखी और असहाय थीं, उनके चारों ओर संकट ही संकट था।

2. ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो।।

ऐसे कठिन समय में, भगवान श्रीराम के दूत हनुमान जी लंका पहुंचे।

उन्होंने सीता माता का पता लगाया और राक्षसों से उनका रक्षण किया।

हनुमान जी ने रावण की सेना के कई राक्षसों का वध किया, जिससे सीता माता को राहत मिली।

3. चाहत सिय अशोक सो आगि हो, दे प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।

सीता माता अपने दुःख से व्याकुल होकर, यहाँ तक सोचने लगीं कि वे स्वयं को अग्नि में भस्म कर लें।

ऐसे समय में हनुमान जी ने श्रीराम की मुद्रिका (अंगूठी) उन्हें दी, जिससे उन्हें आश्वासन मिला कि श्रीराम उन्हें शीघ्र ही मुक्त कराएंगे।

मुद्रिका देखकर सीता माता का दुःख दूर हो गया, उनमें आशा जागृत हुई।

4. को नहीं जानत है जग में, कपि संकटमोचन नाम तिहारो।।

इस संसार में कौन ऐसा है जो हनुमान जी के 'संकटमोचन' नाम को नहीं जानता?

हनुमान जी संकटों को हरने वाले, भक्तों के दुःख दूर करने वाले हैं।

उनका नाम लेते ही सभी संकट दूर हो जाते हैं।

सारांश

इस श्लोक के माध्यम से कवि ने हनुमान जी की महिमा का गुणगान किया है। हनुमान जी ने सीता माता के संकट को दूर किया, उन्हें आश्वासन दिया और राक्षसों का नाश किया। इसी कारण वे 'संकटमोचन' कहलाते हैं। यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि जब भी जीवन में संकट आएं, हनुमान जी की शरण में जाने से वे अवश्य ही हमारे कष्टों का निवारण करेंगे।

शिक्षा

संकट के समय धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए।

प्रभु के दूत और भक्त संकट में सहायता करते हैं।

हनुमान जी की भक्ति से सभी संकट दूर हो सकते हैं।

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