हनुमानाष्टक (श्लोक 15-16)
हनुमानाष्टक श्लोक 15-16 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन
:
श्लोक (हनुमानाष्टक)
काज किए बड़ देवन के तुम, वीर महाप्रभु देखि विचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसो नहीं जात है टारो।।
बेगि हरौ हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।।
भावार्थ
हे वीर महाप्रभु हनुमान जी! आपने देवताओं के भी बड़े-बड़े कार्य किए हैं, यह सबने देखा और समझा है।
हे संकटमोचन! इस संसार में ऐसा कौन सा संकट है, जो आपसे दूर नहीं हो सकता?
हे हनुमान जी! यदि मुझ गरीब पर कोई भी संकट आ जाए, तो आप उसे शीघ्र ही दूर कर दीजिए।
इस संसार में कौन नहीं जानता कि आप ‘संकटमोचन’ के नाम से प्रसिद्ध हैं?
विस्तृत विवेचन
1. हनुमान जी की महिमा
इस श्लोक में कवि ने हनुमान जी की महानता और उनकी संकटमोचन शक्ति का वर्णन किया है।
हनुमान जी ने न केवल भगवान श्रीराम के कार्यों को सिद्ध किया, बल्कि देवताओं के भी असाध्य कार्यों को संपन्न किया।
उनकी वीरता, बुद्धिमत्ता और निष्ठा के कारण समस्त देवता भी उनकी प्रशंसा करते हैं।
2. संकटों का निवारण
कवि कहता है कि संसार में कोई भी संकट ऐसा नहीं है, जिसे हनुमान जी दूर न कर सकें।
चाहे वह शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या आध्यात्मिक संकट हो—हनुमान जी की शरण में जाने पर वह शीघ्र ही दूर हो जाता है।
इसलिए भक्त हनुमान जी से प्रार्थना करता है कि “हे महाप्रभु! मेरे ऊपर जो भी संकट हो, उसे तुरंत दूर कर दीजिए।”
3. ‘संकटमोचन’ नाम की प्रसिद्धि
हनुमान जी को ‘संकटमोचन’ कहा जाता है, अर्थात् संकटों का नाश करने वाले।
यह नाम केवल किसी एक घटना के कारण नहीं, बल्कि उनके जीवनभर के कार्यों के कारण है।
रामायण में भी हनुमान जी ने बार-बार श्रीराम, सीता और लक्ष्मण सहित समस्त वानर सेना के संकटों को दूर किया।
4. भक्त की प्रार्थना
भक्त स्वयं को ‘गरीब’ (अर्थात् असहाय, निर्बल) कहकर हनुमान जी से विनती करता है कि जैसे आपने सबके कार्य किए, वैसे ही मेरे संकटों को भी दूर करें।
यह श्लोक भक्त और भगवान के बीच के विश्वास और प्रेम को दर्शाता है।
निष्कर्ष
इस श्लोक के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि हनुमान जी की शरण में जाने से कोई भी संकट दूर हो सकता है।
उनकी महिमा अपरंपार है, और वे सच्चे अर्थों में ‘संकटमोचन’ हैं।
भक्तों को चाहिए कि वे श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान जी का स्मरण करें और अपने संकटों का समाधान प्राप्त करें।
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