हनुमानाष्टक श्लोक (11-12)

 हनुमानाष्टक श्लोक 11-12 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

श्लोक (हनुमानाष्टक)

रावन जुद्ध अजान कियो तब, नाग की पाश सबै सिर डारो।

श्री रघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो।।

आनि खगेश तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निबारो।

को नहीं जानत है जग में, कपि संकटमोचन नाम तिहारो।।

भावार्थ (Meaning)

जब रावण के साथ युद्ध हुआ, तब उसने (रावण ने) मायावी नागपाश (सर्पों के बंधन) का प्रयोग किया और श्रीराम, लक्ष्मण तथा समस्त वानर सेना को नागपाश में बाँध दिया।

इस भयंकर संकट के समय, सब लोग मोह (मूर्छा) में पड़ गए और कोई भी उपाय नहीं सूझ रहा था।

तब गरुड़ (खगेश) को हनुमान जी ने बुलाया, जिन्होंने नागों के बंधन काट दिए और सबको भयमुक्त कर दिया।

हे हनुमान! संसार में कौन नहीं जानता कि आप संकटमोचन (संकटों का निवारण करने वाले) हैं?

विस्तृत विवेचन (Detailed Explanation)

1. प्रसंग की पृष्ठभूमि

यह श्लोक रामायण के उस प्रसंग से जुड़ा है जब रावण और श्रीराम के बीच युद्ध चल रहा था। रावण ने अपनी मायावी शक्ति से नागपाश का प्रयोग किया, जिससे श्रीराम, लक्ष्मण और समस्त वानर सेना बुरी तरह बंध गए।

नागपाश एक ऐसा अस्त्र था, जिससे निकलने वाले सर्प किसी को भी जकड़ लेते थे और उसे मुक्त होना असंभव हो जाता था।

2. संकट की गहराई

श्रीराम, लक्ष्मण और समस्त वानर दल नागपाश में बंधकर अचेत हो गए। यह संकट अत्यंत भारी था, क्योंकि सेना का नेतृत्व और सामर्थ्य दोनों ही बंधन में थे।

यहाँ 'मोह' का अर्थ है—मूर्छा, असहायता और निराशा की अवस्था।

3. हनुमान जी की भूमिका

हनुमान जी संकटमोचन हैं। उन्होंने संकट की घड़ी में गरुड़ जी (खगेश) को बुलाया।

गरुड़ जी नागों के शत्रु हैं, उनके आते ही नाग भाग गए और बंधन टूट गया।

इस प्रकार हनुमान जी ने श्रीराम, लक्ष्मण और समस्त वानर सेना को संकट से मुक्त कराया।

4. संकटमोचन की उपाधि

श्लोक के अंतिम दो पंक्तियों में कवि ने स्पष्ट किया है कि इस संसार में कौन है जो हनुमान जी के 'संकटमोचन' नाम को नहीं जानता?

हनुमान जी हर प्रकार के संकट का निवारण करने वाले हैं, चाहे वह शारीरिक हो, मानसिक हो या आध्यात्मिक।

संदेश (Message)

विश्वास और भक्ति: जब भी जीवन में कोई बड़ा संकट आए, हनुमान जी की भक्ति और उन पर विश्वास से संकट दूर हो सकता है।

संकटमोचन: हनुमान जी को संकटमोचन इसलिए कहा गया है क्योंकि वे असंभव प्रतीत होने वाले संकटों को भी पल में दूर कर सकते हैं।

सहायता का प्रतीक: हनुमान जी न केवल अपने बल और बुद्धि से, बल्कि समय पर उचित सहायता (जैसे गरुड़ को बुलाना) दिलाकर भी संकट का समाधान करते हैं।

निष्कर्ष

इस श्लोक के माध्यम से हनुमान जी की संकटमोचन शक्ति, उनकी बुद्धिमत्ता, तत्परता और श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति का अद्भुत चित्रण मिलता है।

यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी धैर्य, बुद्धि और श्रद्धा से समाधान संभव है, और हनुमान जी की शरण में जाने से हर संकट दूर हो सकता है।

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