हनुमानाष्टक श्लोक (13-14)
हनुमानाष्टक श्लोक 13-14 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन
:
श्लोक:
बंधु समेत जबै अहिरावण, लै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिहिं पूजि भलि विधि सो बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो।।
जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत संहारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।।
भावार्थ (Meaning)
जब अहिरावण (रावण का भाई) श्रीराम और लक्ष्मण को उनके बंधु (भाई) सहित पकड़कर पाताल लोक (अधोलोक) ले गया, वहाँ उसने देवताओं की पूजा कर, मंत्रों के विचार के साथ उनकी बलि देने की तैयारी की। उसी समय, हे हनुमान! आप वहाँ पहुँचे और अहिरावण सहित उसकी समस्त सेना का संहार कर दिया। हे संकटमोचन! इस संसार में कौन नहीं जानता कि आप संकटों का नाश करने वाले हैं?
विस्तृत विवेचन (Detailed Explanation)
1. पृष्ठभूमि (Background)
हनुमानाष्टक में यह प्रसंग रामायण के उस प्रसिद्ध प्रसंग का उल्लेख करता है, जब अहिरावण ने छलपूर्वक श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक ले गया था। अहिरावण रावण का भाई था और तंत्र-मंत्र में प्रवीण था। उसने दोनों भाइयों की बलि देने का निश्चय किया।
2. श्लोक की पंक्तियों का अर्थ
बंधु समेत जबै अहिरावण, लै रघुनाथ पताल सिधारो।
जब अहिरावण श्रीराम और लक्ष्मण को उनके भाई समेत (अर्थात दोनों भाइयों को) पाताल लोक ले गया।
देबिहिं पूजि भलि विधि सो बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो।।
वहाँ उसने देवताओं की विधिपूर्वक पूजा की और मंत्रों का विचार करते हुए उनकी बलि देने की तैयारी की।
जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत संहारो।
उसी समय, हनुमान जी वहाँ पहुँचे और अहिरावण तथा उसकी सारी सेना का संहार कर दिया।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।।
हे कपि (हनुमान जी), इस संसार में कौन नहीं जानता कि आपका नाम 'संकटमोचन' (संकट दूर करने वाले) है?
3. भावार्थ की गहराई (Depth of Meaning)
इस श्लोक के माध्यम से कवि ने हनुमान जी की अद्भुत शक्ति, बुद्धि और संकटमोचन स्वरूप का वर्णन किया है। जब भगवान राम स्वयं संकट में थे, तब भी हनुमान जी ने उनका उद्धार किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि हनुमान जी केवल भक्तों के ही नहीं, बल्कि भगवान के भी संकट हरने वाले हैं।
4. आध्यात्मिक संदेश (Spiritual Message)
विश्वास और भक्ति:
जब भी कोई भक्त सच्चे मन से हनुमान जी का स्मरण करता है, वे उसकी सहायता के लिए अवश्य आते हैं।
संकटमोचन स्वरूप:
हनुमान जी को 'संकटमोचन' कहा गया है, क्योंकि वे हर प्रकार के संकट का नाश करते हैं, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो।
कर्तव्यनिष्ठा:
हनुमान जी का यह कृत्य हमें यह सिखाता है कि अपने आराध्य या कर्तव्य के प्रति पूर्ण समर्पण और निष्ठा रखनी चाहिए।
5. समकालीन सन्दर्भ (Contemporary Relevance)
आज भी जब कोई व्यक्ति जीवन में किसी भी प्रकार के संकट में होता है, तो वह 'संकटमोचन हनुमान' का स्मरण करता है। यह श्लोक हमें यह प्रेरणा देता है कि किसी भी कठिनाई में धैर्य, साहस और भक्ति से काम लें, संकट अवश्य दूर होंगे।
निष्कर्ष (Conclusion)
इस श्लोक में हनुमान जी की संकटमोचन शक्ति, वीरता और भक्ति का अद्भुत चित्रण है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति, साहस और सेवा-भाव से हर संकट का समाधान संभव है। हनुमान जी का नाम स्मरण मात्र से ही सारे संकट दूर हो जाते हैं, यही इस श्लोक का मुख्य संदेश है।
Comments
Post a Comment